सहरसा: जिले में भू-माफियाओं के दुस्साहस और जालसाजी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. जिले के नरियार मौजा में भू-माफियाओं ने अंचल कार्यालय के भ्रष्ट कर्मियों के साथ साठगांठ कर करीब 85 करोड़ 20 लाख रुपये मूल्य की बेशकीमती सरकारी और बकास्त जमीन को फर्जीवाड़े के जरिए हड़पने का काला खेल रचा है. प्रखर सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट प्रणव कुमार ने इस महाघोटाले का खुलासा किया है. उन्होंने जिलाधिकारी को दिए गए अपने शिकायती पत्र में बेखौफ होकर उन नामों का खुलासा किया है, जो वर्षों से कानून को अपनी जेब में रखकर सरकारी संपत्ति को अपनी जागीर बनाने में जुटे हैं.
शिकायत के अनुसार, स्थानीय भू-माफिया कन्हैया द्विवेदी, रतन द्विवेदी, पवन द्विवेदी और रविकांत द्विवेदी ने राजस्व विभाग के 'दीमकों' (कर्मचारियों) से मिलकर सरकारी जमीन को रैयती घोषित कराने के लिए जाली दस्तावेजों की पूरी समानांतर फैक्ट्री चला रखी है. प्रणव कुमार ने साक्ष्यों के साथ खुलासा किया है कि जवाहर द्विवेदी और मणिकांत द्विवेदी के नाम पर अभिलेखागार (Record Room) में हेराफेरी कर 9 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन का फर्जी रिटर्न दर्ज कराया गया है. यह सीधे तौर पर सरकारी राजस्व की डकैती है, जिसमें विभाग के अंदर बैठे सफेदपोशों का हाथ होने से इनकार नहीं किया जा सकता. सामाजिक कार्यकर्ता ने जिलाधिकारी से कड़े लहजे में आग्रह किया है कि संबंधित खाता-खेसरा को तत्काल 'रोक सूची' (Block List) में डाला जाए, ताकि इस बेशकीमती जमीन की अवैध खरीद-बिक्री पर तुरंत लगाम लग सके.
(रिपोर्ट:- सुप्रित कुमार)
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